ये निखिल सचान का रफ़ रजिस्टर है....इसमें उस वक़्त की कविताएँ हैं, जब मुझे लिखने का ख़ास सलीका नहीं था और आज की बातें है, जब आज भी मैं सलीका सीख ही रहा हूँ ! काश ता-उम्र सीखता रहूँ और इसी शौक़ में ज़िंदगी गुज़र जाए
Monday, 9 March 2026
मुझे पसंद थी वो लड़की
मुझे पसंद थी वो लड़की,
जो तोहफ़े में गुलाब और झुमके नहीं मांगती थी
वो खुद खरीद लाती थी जेब वाली जींस
और कैनवास के जूते
जूते उसके लिए क्रांति का बिगुल थे,
उन मर्दों के खिलाफ
जिन्होंने औरतों के लिए बनाई
ऊँची हील वाली सैंडिलें,
ताकि वो लंगड़ाते हुए कहीं वक़्त पर न पहुँच सकें
और भाग भी न पाएँ, कभी घर छोड़कर
मुझे पसंद थी वो लड़की,
जिसने जेब वाली जीन्स पहनकर
उन मर्दों के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूका
जिन्होंने महिलाओं के लिए बनाई
बिना जेब की उलझी हुई साड़ियाँ और सलवारें
ताकि वो भूलती-खोजती फिरें
चाबियाँ, फोन और लिपस्टिक,
और मर्द ठहाके लेकर उन्हें कह सकें
भुलक्कड़ और लेट लतीफ़
मुझे पसंद थी वो लड़की,
जो इतनी मासूम थी,
कि बस जूते और जींस पहन कर
वो ऐसी क्रांति का ख़्वाब देखती थी
जो हम मर्द - बंदूक और बारूद से
हज़ारों साल में नहीं कर पाए
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