Sunday, 4 October 2026

चींटियाँ

 चींटियों का घर तोड़ा जा सकता है,

लेकिन घर बनाने की उनकी ज़िद
नहीं तोड़ी जा सकती।

चींटियों की ज़िद डायनासोर से भी बड़ी होती है
इसलिए भारी भरकम डायनासोर तो
विलुप्त हो जाते हैं


लेकिन अपनी ज़िद के चलते
कभी विलुप्त नहीं होतीं
नन्ही चींटियाँ

इम्तिहान

 ये मुझे चैन क्यों नहीं पड़ता 

एक ही शख़्स था जहान में क्या?


जिसके जाने पे मुझसे पूछती है चार दीवारें 

कोई घर था, नहीं था, इस मकान में क्या?


कि पूरी उम्र बाकी है, मुसलसल काटनी होगी

ख़त्म होगा - नहीं होगा, इम्तिहान ये क्या?


ज़मीं पर तो बहुत ढूंढा, कहीं दिखती नहीं हो तुम

कि अब मैं चीर के देखूँ, आसमान ये क्या! 


मुझे लगता था, तेरे बिन मैं जीना सीख जाऊँगा

मेरे जीते जी टूटेगा, मेरा गुमान ये क्या ?


तेरे बारे में दिन भर बड़बड़ाता हूँ मैं बक-बक

कि अब मैं काट के रख दूँ, ज़बान ये क्या?