प्रेम में पड़े लोग
उन चीटियों जैसे होते हैं
जो ख़ुद से हज़ार गुना भारी बोझ
सिर पर ढोती फिरती हैं
और अनजाने ही, आ जाती हैं
किसी न किसी के, पाँव के नीचे
प्रेम में पड़े लोग उन चीटियों जैसे होते हैं
जो मिठास की खोज में
ज़िंदगी भर एक क़तार में चलती रहती हैं
पूरी ज़िंदगी, बस एक घर बसाने के लिए
वो शक्कर के दाने जोड़ते रहते हैं
लेकिन घर बसने के पहले ही
मसल दिए जाते हैं, प्रेम में पड़े लोग
इन पागल चीटियों की ही तरह
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