ये निखिल सचान का रफ़ रजिस्टर है....इसमें उस वक़्त की कविताएँ हैं, जब मुझे लिखने का ख़ास सलीका नहीं था और आज की बातें है, जब आज भी मैं सलीका सीख ही रहा हूँ !
काश ता-उम्र सीखता रहूँ और इसी शौक़ में ज़िंदगी गुज़र जाए
Tuesday, 5 November 2013
शून्य
मुझे अनंत की चाह नहीं है
मैं तुम्हारे गर्भ में समा कर चाहता हूँ शून्य हो जाना
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