ये निखिल सचान का रफ़ रजिस्टर है....इसमें उस वक़्त की कविताएँ हैं, जब मुझे लिखने का ख़ास सलीका नहीं था और आज की बातें है, जब आज भी मैं सलीका सीख ही रहा हूँ !
काश ता-उम्र सीखता रहूँ और इसी शौक़ में ज़िंदगी गुज़र जाए
Wednesday, 23 April 2014
मोहोब्बत तेरी याद आई
"आज फिर, कुछ-एक मर्तबा, मोहोब्बत तेरी याद आई हर इक साँस से पहले, हर इक साँस के बाद आई "
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